धार्मिक स्थल
  खजराना गणेश मंदिर

खजराना गणेश मंदिर, इंदौर का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्‍थल है। इस मंदिर का निर्माण रानी अहिल्‍या बाई होल्‍कर द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर हिंदूओं के देवता भगवान गणेश को समर्पित है। यह मंदिर हिंदू धर्म के भक्‍तों के बीच काफी प्रसिद्ध है।
यहां व्‍यापक रूप से माना जाता है कि इस मंदिर में कुछ भी मंगाने पर मन्‍नत पूरी हो जाती है। इसीकारण, इस मंदिर में भगवान का आर्शीवाद लेने हजारों भक्‍तगण आते है और मंदिर की यात्रा करते है। यहां प्रार्थना भी की जाती है। हर बुधवार और रविवार को मंदिर में भारी संख्‍या में श्रृदालु आते है।
मंदिर में अन्‍य देवी व देवताओं की मूर्ति भी स्थित है। विनायक चतुर्थी यहां का मुख्‍य त्‍यौहार है जो भगवान गणेश के सम्‍मान में मनाया जाता है। खजराना गणेश मंदिर केवल स्‍थानीय लोगों के बीच ही नहीं बल्कि दूर देश के भक्‍तों के बीच भी स्थित है। यह पर्यटकों के आर्कषण का प्रमुख स्‍थल है। इंदौर आने वाले पर्यटकों के लिए यह एक खास स्‍थल है।

  गुरुद्वारा

इंदौर में राजवाड़े के करीब ही यशवंत रोड पर इमली साहिब गुरुद्वारा स्थित है | पहले आप सब को यह बता दिया जाय कि उन्ही गुरूद्वारे को साहिब कहा जाता है जहा गुरुनानक साहब रुके थे | इंदौर के बाद आप बेटमा रुके थे जहा बेटमा साहिब गुरुद्वारा स्थित है|
विक्रम संवत 1668 में गुरुनानक साहब अपनी दूसरी उदासी के समय दुनिया को मानवता का पाठ पढाते हुए इंदौर पहुचे और यहाँ इमली के पेड के नीचे रूककर इंदौरवासियो को प्रेम का सन्देश दिया | जहा वर्तमान में इमली साहिब गुरुद्वारा स्थित है |
दूसरी बार सिखो का इंदौर में आगमन फौजियो के रूप में हुआ, जब राजकुमार यशवंत राव होलकर ने अपनी रियासत की रक्षा के लिए सिख फोजियो की मांग पंजाब में महाराजा रणजीतसिह से की| आपने फौजी पंजाब से इंदौर भेजे| इन फोजियो ने अंग्रेजो के बढते प्रभावों तथा कंजर जाति के लुटेरो से होलकर राज्य की रक्षा की| इन्होने अपने हथियार व तोप गोला-बारूद आदि को एक बैरक में रखा था| सिखो की बहादुरी के कारण ही महाराजा होलकर ने आप लोगो को बहुत सारी जमीन इनाम स्वरूप भेट की| यह जमीन वर्तमान का सिख मोहल्ला है और बैरक एम जी रोड स्थित गुरुद्वारा तोपखाना है| 1933 में स्व. कर्नल तारासिंह की धर्मपत्नी काशीबाई ने अपनी सम्पूर्ण जायदाद इस गुरूद्वारे के नाम कर दी|
स्व. दर्शनसिंह आईजी, स्व. लेफ्टिनेंट रामसिंह व स्व. दलजीतसिंह खालसा के अनुसार तीसरी बार इंदौर सिखो का आगमन लकड़ी व्यवसाय के कारण हुआ|

  अन्नपूर्णा मंदिर

अन्‍नपूर्णा, इंदौर में स्थित एक भव्‍य मंदिर है। यह मंदिर कई कारणों से प्रसिद्ध है। यह इंदौर का सबसे पुराना मंदिर है। इस मंदिर को 9 वीं शताब्‍दी में भारत और आर्य व द्रविड़ स्‍थापत्‍य शैली के मिश्रण से बनाया गया था। इस मंदिर की ऊंचाई 100 फीट से भी अधिक है।
इंदौर तस्वीरें, अन्नपूर्णा मंदिर - भोजन की देवी
यह मंदिर, हिंदूओं की देवी अन्‍नपूर्णा को समर्पित है जिन्‍हे भोजन की देवी माना जाता है। मंदिर की अद्भुत स्‍थापत्‍य शैली, विश्‍व प्रसिद्ध मदुरै के मीनाक्षी मंदिर से प्रेरित लगती है। मंदिर का द्वार काफी भव्‍य है। चार बड़े हाथियों की मूर्ति द्वार पर सुसज्जित हैं। मंदिर परिसर के अंदर, अन्‍नपूर्णा, शिव, हनुमान और काल भैरव भगवानों के अलग - अलग मंदिर है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर रंगीन पौराणिक छवियां बनी हुई है।  इस मंदिर का मुख्‍य आकर्षण कमल में बैठे भगवान काशी की साढ़े चौदह फुट ऊंची मूर्ति है।

  बड़ा गणपति मंदिर

बड़ा गणपति मंदिर, इंदौर के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर गणेश जी की विशाल प्रतिमा के कारण विख्‍यात है। गणेश जी की यह मूर्ति 25 फीट ऊंची है जिसे पूरी दुनिया में गणपति की सबसे ऊंची मूर्ति माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण 1875 में किया गया था।
किंवदंतियों के अनुसार, अवंतिका ( उज्‍जैन ) के एक निवासी, श्री दाधीच ने रात में भगवान गणेश की मूर्ति का सपना देखा और अगले दिन उठकर वहां मंदिर बनवाने का फैसला लिया। यह इस मूर्ति के विन्‍यास का सबसे दिलचस्‍प किस्‍सा है।
इस मूर्ति का निर्माण ईटों, चूने के पत्‍थरों, गुड़, सात पठारों की मिट्टी, घोडों, गाय और हाथियों के पैरों कुचली मिट्टी व कीचड़, पंचरत्‍नों के पाउडर ( हीरा, पन्‍ना, मोती, माणिक और पुखराज ) और कई धार्मिक स्‍थलों के पवित्र जल से किया गया है। मूर्ति का ढ़ांचा, सोने, चांदी, पीतल, तांबे और लोहे से बना हुआ है।

  कांच मंदिर,

कांच मंदिर, इंदौर का एक भव्‍य मंदिर है। यह मंदिर सफेद पत्‍थर से बना हुआ है। इस मंदिर को एक मध्‍ययुगीन हवेली के रूप में बनाया गया है जिसमें एक चंदवा बालकनी और शिकारा भी है। मंदिर का अंदरूनी हिस्‍सा पूरी तरह कांच से निर्मित है। कांच मंदिर एक जैन मंदिर है जिसे 20 वीं सदी के मशहूर कपास व्‍यापारी हुकुमचंद ने बनवाया था। मंदिर में कांच का शानदार काम हुआ है।  मंदिर के अंदर दीवारें, छत, खंभे, फर्श, दरवाजे आदि सब कुछ कांच से तैयार किया गया है। मंदिर की आंतरिक संरचना में कई रंगों के कांच को लगाया गया है जो इमारत को शानदार बनाते है। मंदिर की सुंदरता में चार चांद, मंदिर में कांच से बनी झूमरे और अन्‍य सामग्रियों से लग जाती है। मंदिर में भगवान महावीर और तीर्थांकर की मूर्तियां लगी हुई है। इस मंदिर में जैन श्रद्धालु और पर्यटक, दर्शन के लिए जाते है।

  बीजासेन टेकरी, बीजासेन माता

बीजासेन टेकरी, बीजासेन माता को समर्पित एक सुंदर मंदिर है जो इंदौर में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। बीजासेन माता, माता दुर्गा का ही एक स्‍वरूप है। बीजसेन टेकरी के नाम से विख्‍यात यह मंदिर 1920 में बनाया गया था। इस मंदिर से शहर का शानदार नजारा देखने को मिलता है।
हर साल नवरात्रि के दौरान, मंदिर परिसर में नवरात्रि मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में दूर - दूर से श्रद्धालु भाग लेने आते है, स्‍थानीय लोग इस मेले में बहुत आंनद उठाते है। इस मंदिर की पहाड़ी से सूर्यास्‍त देखना भी काफी अनूठा अनुभव है। मंदिर के पास में ही होलकर का गेस्‍ट हाउस भी स्थित है।
लेकिन, वर्तमान में इस गेस्‍ट हाउस को सीमा सुरक्षा बल संग्रहालय में तब्‍दील कर दिया गया है। इंदौर आने वाले हर पर्यटक को यहां की सैर के लिए अवश्‍य आना चाहिए। मंदिर तक इंदौर के एयरपोर्ट, रेलवेस्‍टेशन व सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

  गोमटगिरि

गोमटगिरि, पहाडी़ के बीच प्राकृतिक वातावरण में स्थित है। यह मंदिर जैन समुदाय के लोगों के बीच पूजा का स्‍थल है। यह मंदिर, भगवान गोमटेश्‍वर या बाहुबली की विशाल मूर्ति के कारण प्रसिद्ध है। यह मूर्ति, 21 फीट ऊंची है और श्रवणबेलगोला में स्‍थापित बाहुबली की प्रतिमा की प्रतिकृति है। गोमटगिरि एक ऐसा स्‍थान है जहां जैन धर्म के 24 तीर्थांकरों को समर्पित 24 संगमरमर के मंदिर स्थित है।  यह मंदिर देखने में बेहद सुंदर है। इस भव्‍य मंदिर की सुंदर सफेद दीवारें, यहां के वातावरण को बेहद शांत, सौम्‍य और निर्मल बनाती है जहां के आध्‍यात्मिक माहौल में प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। स्‍थानीय निवासियों के लिए गोमतगिरि, वीकेंड एंजाय करने का पसंदीदा स्‍थल है। इस स्‍थान पर पर्यटकों की सुविधा को ध्‍यान में रखते हुए गेस्‍ट हाउस, रेस्‍तरां और धर्मशाला को भी बनाया गया है।